||हैसियत||

होती सबको है तमन्ना-ए-इश्क की। पर क्या करे लोग भी तो अजीब खेल खेलते है,  लोगो से नही, हैसियत से मोहब्बत करते है।।

।।इन्तजार।।

तेरे जाने का दुख नही, तेरी तपिश से अनछुए रहने का मलाल है ।। तू लौटेगा कल भी, अब ईसी इन्तजार मे काटनी ये रात है ।।